अस्लामो अलैकुम
मैं आप से मुखतिब हुंगा नक़्श्बंदिया मुजद्दिया बिनौरिया के बुजुर्गों के हलात एवं उंके खिदमतों का तज़किरा ले कर /सबसे पहले हज़रत फक़ीर मुहम्म्द नक़्श्बंदिया आला पूर की बात करूगा खुदा हाफिज
हजरत फ़कीर मुहम्मद बादशाहे नक्शबंद आलापूरी रहमतुल्ला अलैह
आप नाक्श्बन्दिया मुज्ददिया बीनौरीय के काबिल वलीउल्लाह और सोफी थे आपकी सोहरत बिहार, बंगाल ,उतर प्रदेश के साथ साथ बंलादेश में भी फ़ैली हुई है /आप हजरत सय्यद वजीर हफीज अली स्न्दील्वी के खास खलीफा थे हजरत फकीर मुहम्मद का खानकाह (आलिया नाक्श्बन्दिया आलापुर जिला लखीसराय बिहार ) इस्थित है / हर साल 14,15,16फरवरी को खानकाह में तीन दिनों का उर्स होता है जिसमे इनके मानने वाले सरीक होते हैं सुबह कूरान्खानी होती है और रात को जलसा जिसमें हजरत के असार ,मन्कब्द और तक़रीर होती है / मेहमानों के खानें रहने का इंतजाम खानकाह की तरफ से होती है / माहौल सूफियाना और अकीदत से सरसार रहताहै/ इस पाक महफिल में सबकी दावत आम होती है / आप भी आसकते हैं खुशी होगी #
हजरत फ़कीर मुहम्मद बादशाहे नक्शबंद आलापूरी रहमतुल्ला अलैह
आप नाक्श्बन्दिया मुज्ददिया बीनौरीय के काबिल वलीउल्लाह और सोफी थे आपकी सोहरत बिहार, बंगाल ,उतर प्रदेश के साथ साथ बंलादेश में भी फ़ैली हुई है /आप हजरत सय्यद वजीर हफीज अली स्न्दील्वी के खास खलीफा थे हजरत फकीर मुहम्मद का खानकाह (आलिया नाक्श्बन्दिया आलापुर जिला लखीसराय बिहार ) इस्थित है / हर साल 14,15,16फरवरी को खानकाह में तीन दिनों का उर्स होता है जिसमे इनके मानने वाले सरीक होते हैं सुबह कूरान्खानी होती है और रात को जलसा जिसमें हजरत के असार ,मन्कब्द और तक़रीर होती है / मेहमानों के खानें रहने का इंतजाम खानकाह की तरफ से होती है / माहौल सूफियाना और अकीदत से सरसार रहताहै/ इस पाक महफिल में सबकी दावत आम होती है / आप भी आसकते हैं खुशी होगी #
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