Thursday, 13 April 2017



                  हजरत अबुबकर शिद्दीक रजिअल्लाह अन्नोह
जन्म-573ई* मक्का                               विसाल -22 आगस्त ६३४ ई*
                  कब्र अतहर- हुजूर के बगल में(मदीना मुकर्मा )    
आप का नाम अब्दुल्लाह और कुनयत अबुबकर और ख़िताब सिद्दीक था लेकिन अबुबकर सिद्दीक इस कदर मशहूर हुए की असल नाम कहीं खो गया /आप के पिता का नाम कहाफा था /सिजरा तैयबा शिद्दीक्या ,नाक्श्बंदिया mujadiya बिनौरिया की अफादियत और फजीलत हजरत अबुबकररजि* के वजह कर ही है/अबुबकररजि* के बारे में हजरत मुजद्दिद अल्फ सानी  अहमद सर्हिन्दी रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं की अनब्या के बाद  इस  ज़मीन पर कोइ अफजल है तो वह हजरत अबुबकर रजिअल्लाह अन्नोह हैं/हुजुर के बात पर लब्बैक कहने वाले , उनकी पैगम्बरी पर ईमान लाने वाले पहले साथी , हिजरत के समय गार में साथ रहे और पर्दा करने के बाद भी  हुजुर के बगल में साथ साथ आराम फरमा रहे हैं / मुसलमानों के पहले खलीफा होने का सर्फ़ हासिल है तो ,उनके खानदान को यह मर्तवा हासिल है की इस्लाम कबूल करनेवाले पहले घराना है/
हुजुर पुरनूर मुहम्मद सलाहों अलैहे वसलम ने  हजरत अबुबकर रजी * के बारे में फ़रमाया___
1 अबुबकर मुझसे है और मैं उससे हूँ /अबू बकर दुनयाऔर आखरत में मेरा भाई है/
2 जो कुछ अल्लाह ने मेरे सीने में डाला वही मैंने अबुबकर के सीने में डाल दिया /
3 कसम अल्लाह व रब्बुल इज्जत की पैगम्मरोंऔर रसूलों के बाद अबुबकर से किसी अफजल शख्श पर सूरज तुलु (निकलना )व गरूब ( डूबना ) नहीं हुआ /
4 ऐ अबुबकर तू पहला शख्श है जो जो मेरी उम्मत में से जन्नत में जाएगा/
5 मैं अपने रब अल्लाह के बाद किसी को खलील बनाता तो अबू बकर को बनाता/
(गुलज़ार ए औलिया से साभार )

Tuesday, 28 March 2017

         हजरत मुहम्मद स्ल्लाह अलैहे वसल्लम
        (खात मुल नबी ,रह्मातुल्लिल आलमीन )
जन्म -21अप्रिल 570ई    विसाल(म्रत्यू) 7 जून ६३२ ई         मजार (कब्र अतहर)-मदीना मनौरा(सयुदी अरब)

आप आखरी नबी एंव पैगम्बरहैं /आप का लकब रहमतुल्लिल आलमीन है (दुन्या के लिए किरपालु )आप के इखलासकी जितनी तारीफ की जाये कम है /आप की ईमानदारी के कारण मक्का वाले आप को अमीन कहा करते थे /आप इतने सच्चे थेकि लोग आप को सादिक कह कर पुकारते थे/इन्साफ पसंद ऐसेकी जब मक्का की मुरम्मत हुई और हजरे असवद (काला पत्थर )रखने की बात हुई तो मक्के के सरदार आपस में लड़ने लगे /लेकिन आप के नाम पर सभी मक्केवाले ने मुहर लगादी /आप के द्वाराअपनाई गयी (चादर पर पत्थर रख कर उसके मुकाम तक लेजाना) तदबीरउन लोगों को इतनी पसंद आई की मक्के के सभी काबिले वाले ने एक साथ कहा मरहबा या मुहम्मद/ नबूवत के एलान के बाद के बाद जब आप पर मक्का वालों ने जुल्म की इन्तहा कर दी, कि आप को मदीना हिजरत करना पड़ा/ लेकिन मक्का से निकलते समय भी आप के लबों पर अल्लाह से फरयाद थी कि या अल्लाह इन्हें राहे हक दिखा/जब फातहे मक्का बन कर लौटे तबभी लोंगों ने देखा मुहम्मद एक सरपाये रहमत बन कर खड़ा है और सभी लोगों को आम माफ़ी दीजारही थी /जबकि इसके पहले जंग जीतने वाले कौमे खून की नदियाँ बहा देते थे /हारने वालों की पूरी नस्लें तहतेग कर दिया जाता था / ये हैं हमारे तुम्हारे सबके प्यारे हबिबे खुदा मुहम्मद सल्लाहे अलैहे वसल्लम/

                 

Thursday, 23 March 2017

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                  हजरत अबुबकर शिद्दीक रजिअल्लाह अन्नोह



                  हजरत अबुबकर शिद्दीक रजिअल्लाह अन्नोह
जन्म-573ई* मक्का                               विसाल -22 आगस्त ६३४ ई*
                  कब्र अतहर- हुजूर के बगल में(मदीना मुकर्मा )    
आप का नाम अब्दुल्लाह और कुनयत अबुबकर और ख़िताब सिद्दीक था लेकिन अबुबकर सिद्दीक इस कदर मशहूर हुए की असल नाम कहीं खो गया /आप के पिता का नाम कहाफा था /सिजरा तैयबा शिद्दीक्या ,नाक्श्बंदिया mujadiya बिनौरिया की अफादियत और फजीलत हजरत अबुबकररजि* के वजह कर ही है/अबुबकररजि* के बारे में हजरत मुजद्दिद अल्फ सानी  अहमद सर्हिन्दी रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं की अनब्या के बाद  इस  ज़मीन पर कोइ अफजल है तो वह हजरत अबुबकर रजिअल्लाह अन्नोह हैं/हुजुर के बात पर लब्बैक कहने वाले , उनकी पैगम्बरी पर ईमान लाने वाले पहले साथी , हिजरत के समय गार में साथ रहे और पर्दा करने के बाद भी  हुजुर के बगल में साथ साथ आराम फरमा रहे हैं / मुसलमानों के पहले खलीफा होने का सर्फ़ हासिल है तो ,उनके खानदान को यह मर्तवा हासिल है की इस्लाम कबूल करनेवाले पहले घराना है/
हुजुर पुरनूर मुहम्मद सलाहों अलैहे वसलम ने  हजरत अबुबकर रजी * के बारे में फ़रमाया___
1 अबुबकर मुझसे है और मैं उससे हूँ /अबू बकर दुनयाऔर आखरत में मेरा भाई है/
2 जो कुछ अल्लाह ने मेरे सीने में डाला वही मैंने अबुबकर के सीने में डाल दिया /
3 कसम अल्लाह व रब्बुल इज्जत की पैगम्मरोंऔर रसूलों के बाद अबुबकर से किसी अफजल शख्श पर सूरज तुलु (निकलना )व गरूब ( डूबना ) नहीं हुआ /
4 ऐ अबुबकर तू पहला शख्श है जो जो मेरी उम्मत में से जन्नत में जाएगा/
5 मैं अपने रब अल्लाह के बाद किसी को खलील बनाता तो अबू बकर को बनाता/
(गुलज़ार ए औलिया से साभार )
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Tuesday, 24 January 2017

               हजरत ख्वाजा वजीर अली संदील्वी रहमतुल्लाह अलैह                                                                           आपका जन्म 18 जिलहिज्जा सन 1240 हिजरी को ग्राम सन्दीला  जिला हरदोई उत्तरः प्रदेश (भारत ) में हुआ /
उनकी दीनी तालीम उस समय के ख्याती प्राप्त मदरसों में हुई / वे एक हाफिज  थे /कहाजाता है कि  जब वे क़ुरान  की तिलावत (  पढते ) तो लोगों  पर व्ज़द तारी  होजाता था /आपका ख़ानदान चिश्तिया क़ादिरया से तालुक़  रखने वाले लोग थे / इस लिये उनकी रूहानी तरबियत की सुरुआत इसी सिलसिला से  की गयी और उनको फैज़ भी हासिल हुआ /लेकिन दिल की तिस्नगी हासिल नही होती थी /एकदिन ख्वाब(स्वप्न)में हजरत सय्यद सोफी गुल काबुली रहमतुल्लाह अलैह को देखे तो उनको लगा ये बुजुर्ग मुझे मेरे मंजिल तक पहुंचा सकते हैं /सफर   की कठिनाईयों को बर्दास्त करते हुए अपने शेख ,मुर्शिद तक पहुँच ही गये /हजरत काबुली रहमातुल्लाह अलैह के तालीम ने उनेह  नाक्श्बंदिया मुजद्दिया के एक कामिल वलीउल्लाह बनादिये /उन्हें मंजिले मक़सूद ,हकीकत व मार्फ़त हासिल हुआ /उनका दिल अल्लाह के नूर से मनव्वर होगयाऔर दिल की तिस्नगीदूर होगयी /वापसआकर दीनकी तबलीग के लिए ज़िन्दगी भर कोशिश करते रहे /उनकी मेहनतों का नतीजा है कि उनके तालिबइल्म हजारोंकी संख्या में फैलेहुए थे /उनके खुल्फाओ की संख्याभी भी काफी थे /इनमेंहजरत फकीर मुहम्मदआलापूरी रहमतुल्लाअलैह का नाम खास खुलफा में लिया जाता है /
आपका विसाल (daith)1348 में सन्दीलामें खानकाह सरा हौज में हुआ हर वर्ष अरबी महीना के सफर में 24से 28तारिख तक उर्स मुबारक होता है /
                आसमांउनकी लहद पर शबनमअफ्शानी  करे

       @   स्ब्जाह नौरास्ता उस घर की निगहबानी करे