Tuesday, 30 May 2017
Thursday, 25 May 2017
Thursday, 13 April 2017
हजरत अबुबकर शिद्दीक रजिअल्लाह
अन्नोह
जन्म-573ई* मक्का विसाल -22 आगस्त
६३४ ई*
कब्र अतहर- हुजूर के बगल में(मदीना मुकर्मा )
आप का नाम अब्दुल्लाह और कुनयत अबुबकर और ख़िताब
सिद्दीक था लेकिन अबुबकर सिद्दीक इस कदर मशहूर हुए की असल नाम कहीं खो गया /आप के
पिता का नाम कहाफा था /सिजरा तैयबा शिद्दीक्या ,नाक्श्बंदिया mujadiya बिनौरिया की
अफादियत और फजीलत हजरत अबुबकररजि* के वजह कर ही है/अबुबकररजि* के बारे में हजरत
मुजद्दिद अल्फ सानी अहमद सर्हिन्दी
रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं की अनब्या के बाद
इस ज़मीन पर कोइ अफजल है तो वह हजरत
अबुबकर रजिअल्लाह अन्नोह हैं/हुजुर के बात पर लब्बैक कहने वाले , उनकी पैगम्बरी पर
ईमान लाने वाले पहले साथी , हिजरत के समय गार में साथ रहे और पर्दा करने के बाद
भी हुजुर के बगल में साथ साथ आराम फरमा
रहे हैं / मुसलमानों के पहले खलीफा होने का सर्फ़ हासिल है तो ,उनके खानदान को यह
मर्तवा हासिल है की इस्लाम कबूल करनेवाले पहले घराना है/
हुजुर पुरनूर मुहम्मद सलाहों अलैहे वसलम ने हजरत अबुबकर रजी * के बारे में फ़रमाया___
1 अबुबकर मुझसे है और मैं उससे हूँ /अबू बकर
दुनयाऔर आखरत में मेरा भाई है/
2 जो कुछ अल्लाह ने मेरे सीने में डाला वही मैंने
अबुबकर के सीने में डाल दिया /
3 कसम अल्लाह व रब्बुल इज्जत की पैगम्मरोंऔर
रसूलों के बाद अबुबकर से किसी अफजल शख्श पर सूरज तुलु (निकलना )व गरूब ( डूबना )
नहीं हुआ /
4 ऐ अबुबकर तू पहला शख्श है जो जो मेरी उम्मत में
से जन्नत में जाएगा/
5 मैं अपने रब अल्लाह के बाद किसी को खलील बनाता
तो अबू बकर को बनाता/
(गुलज़ार ए औलिया से साभार )
Tuesday, 28 March 2017
हजरत मुहम्मद स्ल्लाह अलैहे वसल्लम
(खात मुल नबी ,रह्मातुल्लिल आलमीन )
जन्म
-21अप्रिल 570ई विसाल(म्रत्यू) 7 जून ६३२ ई मजार (कब्र अतहर)-मदीना मनौरा(सयुदी अरब)
आप आखरी नबी एंव पैगम्बरहैं /आप का लकब रहमतुल्लिल आलमीन है (दुन्या के लिए किरपालु )आप के इखलासकी जितनी तारीफ की जाये कम है /आप की ईमानदारी के कारण मक्का वाले आप को अमीन कहा करते थे /आप इतने सच्चे थेकि लोग आप को सादिक कह कर पुकारते थे/इन्साफ पसंद ऐसेकी जब मक्का की मुरम्मत हुई और हजरे असवद (काला पत्थर )रखने की बात हुई तो मक्के के सरदार आपस में लड़ने लगे /लेकिन आप के नाम पर सभी मक्केवाले ने मुहर लगादी /आप के द्वाराअपनाई गयी (चादर पर पत्थर रख कर उसके मुकाम तक लेजाना) तदबीरउन लोगों को इतनी पसंद आई की मक्के के सभी काबिले वाले ने एक साथ कहा मरहबा या मुहम्मद/ नबूवत के एलान के बाद के बाद जब आप पर मक्का वालों ने जुल्म की इन्तहा कर दी, कि आप को मदीना हिजरत करना पड़ा/ लेकिन मक्का से निकलते समय भी आप के लबों पर अल्लाह से फरयाद थी कि या अल्लाह इन्हें राहे हक दिखा/जब फातहे मक्का बन कर लौटे तबभी लोंगों ने देखा मुहम्मद एक सरपाये रहमत बन कर खड़ा है और सभी लोगों को आम माफ़ी दीजारही थी /जबकि इसके पहले जंग जीतने वाले कौमे खून की नदियाँ बहा देते थे /हारने वालों की पूरी नस्लें तहतेग कर दिया जाता था / ये हैं हमारे तुम्हारे सबके प्यारे हबिबे खुदा मुहम्मद सल्लाहे अलैहे वसल्लम/
Thursday, 23 March 2017
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हजरत अबुबकर शिद्दीक रजिअल्लाह अन्नोह
हजरत अबुबकर शिद्दीक रजिअल्लाह
अन्नोह
जन्म-573ई* मक्का विसाल -22 आगस्त
६३४ ई*
कब्र अतहर- हुजूर के बगल में(मदीना मुकर्मा )
आप का नाम अब्दुल्लाह और कुनयत अबुबकर और ख़िताब
सिद्दीक था लेकिन अबुबकर सिद्दीक इस कदर मशहूर हुए की असल नाम कहीं खो गया /आप के
पिता का नाम कहाफा था /सिजरा तैयबा शिद्दीक्या ,नाक्श्बंदिया mujadiya बिनौरिया की
अफादियत और फजीलत हजरत अबुबकररजि* के वजह कर ही है/अबुबकररजि* के बारे में हजरत
मुजद्दिद अल्फ सानी अहमद सर्हिन्दी
रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं की अनब्या के बाद
इस ज़मीन पर कोइ अफजल है तो वह हजरत
अबुबकर रजिअल्लाह अन्नोह हैं/हुजुर के बात पर लब्बैक कहने वाले , उनकी पैगम्बरी पर
ईमान लाने वाले पहले साथी , हिजरत के समय गार में साथ रहे और पर्दा करने के बाद
भी हुजुर के बगल में साथ साथ आराम फरमा
रहे हैं / मुसलमानों के पहले खलीफा होने का सर्फ़ हासिल है तो ,उनके खानदान को यह
मर्तवा हासिल है की इस्लाम कबूल करनेवाले पहले घराना है/
हुजुर पुरनूर मुहम्मद सलाहों अलैहे वसलम ने हजरत अबुबकर रजी * के बारे में फ़रमाया___
1 अबुबकर मुझसे है और मैं उससे हूँ /अबू बकर
दुनयाऔर आखरत में मेरा भाई है/
2 जो कुछ अल्लाह ने मेरे सीने में डाला वही मैंने
अबुबकर के सीने में डाल दिया /
3 कसम अल्लाह व रब्बुल इज्जत की पैगम्मरोंऔर
रसूलों के बाद अबुबकर से किसी अफजल शख्श पर सूरज तुलु (निकलना )व गरूब ( डूबना )
नहीं हुआ /
4 ऐ अबुबकर तू पहला शख्श है जो जो मेरी उम्मत में
से जन्नत में जाएगा/
5 मैं अपने रब अल्लाह के बाद किसी को खलील बनाता
तो अबू बकर को बनाता/
(गुलज़ार ए औलिया से साभार )
Thursday, 23 February 2017
Tuesday, 24 January 2017
हजरत ख्वाजा वजीर अली संदील्वी रहमतुल्लाह अलैह आपका
जन्म 18 जिलहिज्जा सन 1240 हिजरी को ग्राम सन्दीला जिला हरदोई उत्तरः प्रदेश
(भारत ) में हुआ /
उनकी दीनी तालीम उस समय के ख्याती प्राप्त
मदरसों में हुई / वे एक हाफिज थे /कहाजाता है कि जब वे क़ुरान की
तिलावत ( पढते ) तो लोगों पर व्ज़द तारी होजाता था /आपका ख़ानदान
चिश्तिया क़ादिरया से तालुक़ रखने वाले लोग थे / इस लिये उनकी रूहानी तरबियत
की सुरुआत इसी सिलसिला से की गयी और उनको फैज़ भी हासिल हुआ /लेकिन दिल की
तिस्नगी हासिल नही होती थी /एकदिन ख्वाब(स्वप्न)में हजरत सय्यद सोफी गुल काबुली
रहमतुल्लाह अलैह को देखे तो उनको लगा ये बुजुर्ग मुझे मेरे मंजिल तक पहुंचा सकते
हैं /सफर की कठिनाईयों को बर्दास्त करते
हुए अपने शेख ,मुर्शिद तक पहुँच ही गये /हजरत काबुली रहमातुल्लाह अलैह के तालीम ने
उनेह नाक्श्बंदिया मुजद्दिया के एक कामिल
वलीउल्लाह बनादिये /उन्हें मंजिले मक़सूद ,हकीकत व मार्फ़त हासिल हुआ /उनका दिल
अल्लाह के नूर से मनव्वर होगयाऔर दिल की तिस्नगीदूर होगयी /वापसआकर दीनकी तबलीग के
लिए ज़िन्दगी भर कोशिश करते रहे /उनकी मेहनतों का नतीजा है कि उनके तालिबइल्म
हजारोंकी संख्या में फैलेहुए थे /उनके खुल्फाओ की संख्याभी भी काफी थे /इनमेंहजरत
फकीर मुहम्मदआलापूरी रहमतुल्लाअलैह का नाम खास खुलफा में लिया जाता है /
आपका विसाल (daith)1348 में सन्दीलामें खानकाह सरा हौज में हुआ हर वर्ष
अरबी महीना के सफर में 24से 28तारिख तक उर्स मुबारक होता है /
आसमांउनकी लहद पर शबनमअफ्शानी करे
@
स्ब्जाह नौरास्ता उस घर की निगहबानी करे
Monday, 16 January 2017
Thursday, 12 January 2017
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