Tuesday, 24 January 2017

               हजरत ख्वाजा वजीर अली संदील्वी रहमतुल्लाह अलैह                                                                           आपका जन्म 18 जिलहिज्जा सन 1240 हिजरी को ग्राम सन्दीला  जिला हरदोई उत्तरः प्रदेश (भारत ) में हुआ /
उनकी दीनी तालीम उस समय के ख्याती प्राप्त मदरसों में हुई / वे एक हाफिज  थे /कहाजाता है कि  जब वे क़ुरान  की तिलावत (  पढते ) तो लोगों  पर व्ज़द तारी  होजाता था /आपका ख़ानदान चिश्तिया क़ादिरया से तालुक़  रखने वाले लोग थे / इस लिये उनकी रूहानी तरबियत की सुरुआत इसी सिलसिला से  की गयी और उनको फैज़ भी हासिल हुआ /लेकिन दिल की तिस्नगी हासिल नही होती थी /एकदिन ख्वाब(स्वप्न)में हजरत सय्यद सोफी गुल काबुली रहमतुल्लाह अलैह को देखे तो उनको लगा ये बुजुर्ग मुझे मेरे मंजिल तक पहुंचा सकते हैं /सफर   की कठिनाईयों को बर्दास्त करते हुए अपने शेख ,मुर्शिद तक पहुँच ही गये /हजरत काबुली रहमातुल्लाह अलैह के तालीम ने उनेह  नाक्श्बंदिया मुजद्दिया के एक कामिल वलीउल्लाह बनादिये /उन्हें मंजिले मक़सूद ,हकीकत व मार्फ़त हासिल हुआ /उनका दिल अल्लाह के नूर से मनव्वर होगयाऔर दिल की तिस्नगीदूर होगयी /वापसआकर दीनकी तबलीग के लिए ज़िन्दगी भर कोशिश करते रहे /उनकी मेहनतों का नतीजा है कि उनके तालिबइल्म हजारोंकी संख्या में फैलेहुए थे /उनके खुल्फाओ की संख्याभी भी काफी थे /इनमेंहजरत फकीर मुहम्मदआलापूरी रहमतुल्लाअलैह का नाम खास खुलफा में लिया जाता है /
आपका विसाल (daith)1348 में सन्दीलामें खानकाह सरा हौज में हुआ हर वर्ष अरबी महीना के सफर में 24से 28तारिख तक उर्स मुबारक होता है /
                आसमांउनकी लहद पर शबनमअफ्शानी  करे

       @   स्ब्जाह नौरास्ता उस घर की निगहबानी करे         

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