हजरत ख्वाजा वजीर अली संदील्वी रहमतुल्लाह अलैह आपका
जन्म 18 जिलहिज्जा सन 1240 हिजरी को ग्राम सन्दीला जिला हरदोई उत्तरः प्रदेश
(भारत ) में हुआ /
उनकी दीनी तालीम उस समय के ख्याती प्राप्त
मदरसों में हुई / वे एक हाफिज थे /कहाजाता है कि जब वे क़ुरान की
तिलावत ( पढते ) तो लोगों पर व्ज़द तारी होजाता था /आपका ख़ानदान
चिश्तिया क़ादिरया से तालुक़ रखने वाले लोग थे / इस लिये उनकी रूहानी तरबियत
की सुरुआत इसी सिलसिला से की गयी और उनको फैज़ भी हासिल हुआ /लेकिन दिल की
तिस्नगी हासिल नही होती थी /एकदिन ख्वाब(स्वप्न)में हजरत सय्यद सोफी गुल काबुली
रहमतुल्लाह अलैह को देखे तो उनको लगा ये बुजुर्ग मुझे मेरे मंजिल तक पहुंचा सकते
हैं /सफर की कठिनाईयों को बर्दास्त करते
हुए अपने शेख ,मुर्शिद तक पहुँच ही गये /हजरत काबुली रहमातुल्लाह अलैह के तालीम ने
उनेह नाक्श्बंदिया मुजद्दिया के एक कामिल
वलीउल्लाह बनादिये /उन्हें मंजिले मक़सूद ,हकीकत व मार्फ़त हासिल हुआ /उनका दिल
अल्लाह के नूर से मनव्वर होगयाऔर दिल की तिस्नगीदूर होगयी /वापसआकर दीनकी तबलीग के
लिए ज़िन्दगी भर कोशिश करते रहे /उनकी मेहनतों का नतीजा है कि उनके तालिबइल्म
हजारोंकी संख्या में फैलेहुए थे /उनके खुल्फाओ की संख्याभी भी काफी थे /इनमेंहजरत
फकीर मुहम्मदआलापूरी रहमतुल्लाअलैह का नाम खास खुलफा में लिया जाता है /
आपका विसाल (daith)1348 में सन्दीलामें खानकाह सरा हौज में हुआ हर वर्ष
अरबी महीना के सफर में 24से 28तारिख तक उर्स मुबारक होता है /
आसमांउनकी लहद पर शबनमअफ्शानी करे
@
स्ब्जाह नौरास्ता उस घर की निगहबानी करे
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