हजरत मुहम्मद स्ल्लाह अलैहे वसल्लम
(खात मुल नबी ,रह्मातुल्लिल आलमीन )
जन्म
-21अप्रिल 570ई विसाल(म्रत्यू) 7 जून ६३२ ई मजार (कब्र अतहर)-मदीना मनौरा(सयुदी अरब)
आप आखरी नबी एंव
पैगम्बरहैं /आप का लकब रहमतुल्लिल आलमीन है (दुन्या के लिए किरपालु )आप के इखलासकी
जितनी तारीफ की जाये कम है /आप की ईमानदारी के कारण मक्का वाले आप को अमीन कहा
करते थे /आप इतने सच्चे थेकि लोग आप को सादिक कह कर पुकारते थे/इन्साफ पसंद ऐसेकी
जब मक्का की मुरम्मत हुई और हजरे असवद (काला पत्थर )रखने की बात हुई तो मक्के के
सरदार आपस में लड़ने लगे /लेकिन आप के नाम पर सभी मक्केवाले ने मुहर लगादी /आप के
द्वाराअपनाई गयी (चादर पर पत्थर रख कर उसके मुकाम तक लेजाना) तदबीरउन लोगों को
इतनी पसंद आई की मक्के के सभी काबिले वाले ने एक साथ कहा मरहबा या मुहम्मद/ नबूवत
के एलान के बाद के बाद जब आप पर मक्का वालों ने जुल्म की इन्तहा कर दी, कि आप को मदीना
हिजरत करना पड़ा/ लेकिन मक्का से
निकलते समय भी आप के लबों पर अल्लाह से फरयाद थी कि या अल्लाह इन्हें राहे हक
दिखा/जब फातहे मक्का बन कर लौटे तबभी लोंगों ने देखा मुहम्मद एक सरपाये रहमत बन कर
खड़ा है और सभी लोगों को आम माफ़ी दीजारही थी /जबकि इसके पहले जंग जीतने वाले कौमे
खून की नदियाँ बहा देते थे /हारने वालों की पूरी नस्लें तहतेग कर दिया जाता था / ये
हैं हमारे तुम्हारे सबके प्यारे हबिबे खुदा मुहम्मद सल्लाहे अलैहे वसल्लम/
No comments:
Post a Comment